जब हम आज के दौर में टॉपर्स की कहानियाँ सुनते हैं, तो अक्सर महंगे कोचिंग सेंटर्स, क्रैश कोर्स और भारी-भरकम फीस वाली ट्यूशन का जिक्र होता है। लेकिन मानसी जांगिड़ ने इस धारणा को पूरी तरह से बदल दिया है। जोधपुर की इस होनहार छात्रा ने बिना किसी बाहरी मदद या कोचिंग के राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) की 12वीं की कला (Arts) परीक्षा में 99.20% अंक हासिल कर सबको हैरान कर दिया है। 500 में से 496 अंक पाना कोई मामूली बात नहीं है, खासकर तब जब आपके पास संसाधनों की कमी हो।
यह पूरी कहानी 31 मार्च 2026 की सुबह शुरू हुई, जब RBSE 12वीं परिणाम घोषणाअजमेर, सुबह 10 बजे आधिकारिक तौर पर घोषित की गई। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बोर्ड सचिव के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में परिणामों का खुलासा किया। 12 फरवरी से 11 मार्च 2026 के बीच चली इन परीक्षाओं में मानसी ने अपनी मेहनत से वह मुकाम हासिल किया, जो कई बड़े संस्थानों के छात्र नहीं कर पाते।
बिना कोचिंग, सिर्फ सेल्फ स्टडी का जादू
मानसी की सफलता का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि उन्होंने किसी भी कोचिंग क्लास का सहारा नहीं लिया। उन्होंने अपने स्कूल के पाठ्यक्रम पर भरोसा किया और खुद का एक अनुशासन बनाया। मानसी रोजाना करीब 6 घंटे पढ़ाई करती थीं। यहाँ तक कि उन्होंने अपनी पढ़ाई का एक सख्त शेड्यूल बनाया था और लगातार अभ्यास (Continuous Practice) को अपना हथियार बनाया।
अगर उनके अंकों पर नजर डालें, तो उनकी प्रतिभा और स्पष्टता साफ झलकती है। मानसी ने अंग्रेजी, राजनीति विज्ञान और भूगोल—इन तीन विषयों में पूरे 100 अंक हासिल किए। वहीं, हिंदी और इतिहास में उन्हें 98-98 अंक मिले। यह प्रदर्शन न केवल उन्हें प्रथम श्रेणी (First Class) दिलाता है, बल्कि यह साबित करता है कि अगर योजना सही हो, तो किताबें ही सबसे अच्छी गुरु होती हैं।
संघर्ष से सफलता तक: परिवार की कहानी
मानसी की यह जीत केवल उनकी नहीं, बल्कि उनके माता-पिता के संघर्ष की भी जीत है। उनका परिवार आर्थिक रूप से बहुत मजबूत नहीं है, लेकिन शिक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता अटूट रही। मानसी की माँ घर चलाने के लिए आटा चक्की चलाती हैं और साथ ही सिलाई-कढ़ाई का काम भी करती हैं। उनके पिता फर्नीचर बनाने का काम करते हैं। घर की माली हालत तंग होने के बावजूद, परिवार ने कभी भी मानसी की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। (सोचिए, एक माँ जो दिन भर चक्की और सिलाई मशीन के बीच जूझती है, उसने अपनी बेटी के सपनों को पंख देने के लिए कितनी मेहनत की होगी)।
इस असाधारण उपलब्धि के बाद, मानसी के स्कूल ने उनकी प्रतिभा का सम्मान करते हुए उन्हें 5 लाख रुपये मूल्य की एक कार उपहार में देने का वादा किया है। यह इनाम केवल एक वाहन नहीं, बल्कि मानसी की रातों की नींद और उनके परिवार के त्याग का प्रतिफल है।
राजस्थान टॉपर्स और परिणामों का विश्लेषण
हालांकि मानसी का प्रदर्शन शानदार रहा, लेकिन राज्य स्तर पर एक और नाम चर्चा में है। बाड़मेर जिले के सरली गाँव के एक किसान पुत्र नरपत ने कला वर्ग में 99.70% अंक प्राप्त कर पूरे राजस्थान में टॉप किया है। यह देखना दिलचस्प है कि इस बार ग्रामीण इलाकों और साधारण परिवारों के बच्चों ने शैक्षिक जगत में अपनी मजबूत पकड़ बनाई है।
इस साल के परिणामों का एक बड़ा ट्रेंड यह रहा कि लड़कियों ने तीनों स्ट्रीम्स—विज्ञान, कला और वाणिज्य (Commerce)—में लड़कों से बेहतर प्रदर्शन किया है। बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट rajeduboard.rajasthan.gov.in पर जब नतीजे जारी हुए, तो यह स्पष्ट हो गया कि राजस्थान की बेटियाँ अब शिक्षा के हर मोर्चे पर आगे बढ़ रही हैं।
भविष्य की राह: अब लक्ष्य है UPSC
इतनी बड़ी सफलता के बाद अब मानसी की नजरें देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक, सिविल सेवा परीक्षा (UPSC) पर हैं। उनका सपना है कि वह एक प्रशासनिक अधिकारी बनकर राष्ट्र की सेवा करें। उनका मानना है कि समर्पण और कड़ी मेहनत से किसी भी लक्ष्य को पाया जा सकता है, चाहे आपके पास संसाधन हों या न हों।
आगे क्या? पूरक परीक्षाएं और अवसर
जो छात्र इस बार सफल नहीं हो पाए या जिन्हें अपने अंकों में सुधार करना है, उनके लिए बोर्ड ने अगस्त-सितंबर 2026 में कंपार्टमेंट (पूरक) परीक्षाओं का आयोजन तय किया है। यह उन छात्रों के लिए एक दूसरा मौका है जो अपनी गलतियों को सुधार कर आगे बढ़ना चाहते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
मानसी जांगिड़ ने 12वीं में कितने अंक प्राप्त किए?
मानसी जांगिड़ ने RBSE 12वीं कला वर्ग में 500 में से कुल 496 अंक प्राप्त किए, जो 99.20% प्रतिशत के बराबर है। उन्होंने अंग्रेजी, राजनीति विज्ञान और भूगोल में शत-प्रतिशत (100) अंक हासिल किए।
बिना कोचिंग के टॉप करने के लिए मानसी की रणनीति क्या थी?
मानसी ने पूरी तरह से स्कूल के पाठ्यक्रम पर ध्यान केंद्रित किया और प्रतिदिन लगभग 6 घंटे सेल्फ स्टडी की। उनकी सफलता का मुख्य मंत्र सही योजना, नियमित अध्ययन शेड्यूल और विषयों का निरंतर अभ्यास था।
RBSE 12वीं 2026 के परिणाम कब और कैसे घोषित किए गए?
परिणाम 31 मार्च 2026 को सुबह 10 बजे शिक्षा मंत्री मदन दिलावर द्वारा अजमेर में घोषित किए गए। छात्र अपने परिणाम बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट rajeduboard.rajasthan.gov.in पर देख सकते थे।
राजस्थान राज्य में 12वीं कला वर्ग का टॉपर कौन है?
राजस्थान राज्य में कला वर्ग के टॉपर बाड़मेर जिले के सरली गाँव के नरपत हैं, जिन्होंने 99.70% अंक प्राप्त कर राज्य स्तर पर प्रथम स्थान हासिल किया है।
फेल हुए छात्रों के लिए पूरक परीक्षाएं कब होंगी?
राजस्थान बोर्ड द्वारा उन छात्रों के लिए जो किसी विषय में अनुत्तीर्ण रहे हैं, अगस्त और सितंबर 2026 के बीच कंपार्टमेंट (पूरक) परीक्षाओं का आयोजन किया जाएगा।
vipul gangwar
वाकई बहुत प्रेरणादायक कहानी है। आज के समय में जब हर कोई कोचिंग के पीछे भाग रहा है, मानसी ने साबित कर दिया कि खुद की मेहनत और अनुशासन सबसे बड़ा हथियार है। उनकी माँ का संघर्ष सुनकर दिल भर आया, आटा चक्की और सिलाई का काम करके बेटी को पढ़ाना कोई छोटी बात नहीं है।
Anil Kapoor
बिना कोचिंग के टॉप करना सुनने में अच्छा लगता है पर असलियत यह है कि बोर्ड एग्जाम्स में मार्क्स अक्सर चेकिंग और आंसर राइटिंग स्किल्स पर निर्भर करते हैं। सिर्फ सेल्फ स्टडी से 99% लाना बहुत दुर्लभ है, शायद स्कूल के टीचर्स ने काफी मदद की होगी जिसे कहानी में नहीं बताया गया।
Santosh Sharma
शानदार उपलब्धि है मानसी की मेहनत रंग लाई
ANISHA SRINIVAS
कितना गर्व महसूस हो रहा है यह पढ़कर! ❤️ मानसी की मेहनत और उनके माता-पिता का त्याग वाकई काबिले तारीफ है। जो बच्चे संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं, उन्हें मानसी से सीखना चाहिए कि जज़्बा हो तो कुछ भी हासिल किया जा सकता है। ऑल द बेस्ट UPSC के लिए! 🌟
Sharath Narla
वाह, कार का इनाम! मतलब अब पढ़ाई के बाद सीधे लग्जरी लाइफ। वैसे यह ट्रेंड बड़ा मजेदार है कि जब तक कोई रिकॉर्ड न तोड़ दे, तब तक सिस्टम को हमारी मेहनत नहीं दिखती। पर चलो, कम से कम किसी को तो मिला।
jagrut jain
कार देना सिर्फ दिखावा है। असली इनाम तो वह सम्मान है जो उन्हें मिला।
Pradeep Maurya
यह केवल एक छात्रा की सफलता नहीं है, बल्कि हमारे भारतीय ग्रामीण समाज की उस अदम्य इच्छाशक्ति का प्रतीक है जो विपरीत परिस्थितियों में भी सिर उठाकर जीना जानती है। मानसी और नरपत जैसे युवाओं ने यह सिद्ध कर दिया है कि ज्ञान किसी विशेष शहर या महंगे संस्थान की जागीर नहीं है, बल्कि वह तो उस तपस्या का फल है जो एक विद्यार्थी अपनी किताबों के साथ एकांत में करता है। हमें अपने समाज में इस तरह की कहानियों को और अधिक बढ़ावा देना चाहिए ताकि हर गरीब बच्चा यह विश्वास कर सके कि उसकी किस्मत उसके हाथों की लकीरों में नहीं, बल्कि उसकी कलम की ताकत में छिपी है।
megha iyer
मुझे तो समझ नहीं आता कि लोग इतनी साधारण बातों पर इतना शोर क्यों मचाते हैं। बस पढ़ाई की और मार्क्स मिल गए, इसमें इतना बड़ा क्या है?
Sathyavathi S
ओह माय गॉड! 99.20% और बिना कोचिंग के? यह तो बिल्कुल फिल्मी कहानी जैसा है! मुझे यकीन नहीं हो रहा कि कोई 6 घंटे पढ़कर इतना स्कोर कर सकता है। वैसे अब सबको UPSC की तैयारी करनी है, तभी तो असली कॉम्पिटिशन शुरू होगा, देखते हैं आगे क्या होता है!
priyanka rajapurkar
हाँ, क्योंकि कोचिंग सेंटर तो बस पैसे छापने की मशीन बन गए हैं, असली पढ़ाई तो घर पर ही होती है। वैसे मानसी का स्कोर देखकर मुझे अपने पुराने दिनों की याद आ गई जब हम भी सिर्फ किताबों पर भरोसा करते थे, हालांकि हमें कार नहीं मिली थी।
Paul Smith
भैया ये तो बहुत ही कमाल की बात है कि मानसी ने बिना किसी हेल्प के ऐसा कर दिखाया! हमें बस अपने आप पर भरोसा रखना चाहिए और बस मेहनत करते रहना चाहिए। मेहनत का फल मीठा होता है ये बात यहाँ सच साबित हुई है और मानसी की कहानी से हजारों बच्चे मोटिवेट होंगे जो आज भी गाँव में रहकर अपनी किस्मत बदलना चाहते हैं। बस ऐसे ही पढ़ते रहो और आगे बढ़ते रहो दोस्तों, कोई भी सपना छोटा या बड़ा नहीं होता बस उसे पूरा करने की लगन होनी चाहिए और घर वालों का सपोर्ट मिल जाए तो फिर तो बस जीत पक्की है!
Pankaj Verma
UPSC की तैयारी के लिए अब मानसी को एक सही मार्गदर्शन की जरूरत होगी। 12वीं के मार्क्स एक तरफ हैं और सिविल सेवा की तैयारी एक अलग स्तर की चुनौती है। उन्हें अब बेसिक एनसीईआरटी किताबों से शुरुआत करनी चाहिए और करंट अफेयर्स पर पकड़ मजबूत करनी चाहिए।
Dr. Sanjay Kumar
गजब है भाई! मतलब बंदा बिना किसी ट्यूशन के 100 आउट ऑफ 100 ले आया! कसम से, ये तो एकदम बवाल चीज है। हमारे टाइम पर तो स्कूल के बाद भी ट्यूशन जाते थे तब जाके ठीक ठाक नंबर आते थे। मानसी ने तो सिस्टम ही हिला दिया!
Arumugam kumarasamy
यह अत्यंत संतोषजनक है कि राजस्थान की बेटियाँ शिक्षा के क्षेत्र में इतना उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। संसाधनों का अभाव कभी भी प्रतिभा के मार्ग में बाधा नहीं बनना चाहिए, जैसा कि मानसी ने प्रमाणित किया है। भारत की वास्तविक शक्ति उसकी ग्रामीण प्रतिभाओं में ही निहित है और ऐसे उदाहरण हमारे राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की ओर संकेत करते हैं।
Suman Rida
बहुत अच्छी बात है। बस उम्मीद है कि वह अपनी विनम्रता बनाए रखें।